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बिल ऑफ़ सप्लाई: फ़ॉर्मेट और कब इस्तेमाल करें
बिल ऑफ़ सप्लाई ऐसा बिल है जिसमें GST नहीं होता। यह तब बनाया जाता है जब विक्रेता टैक्स नहीं ले सकता: या तो विक्रेता कंपोज़िशन स्कीम में है, या जो सामान बिक रहा है वह GST से छूट वाला है।
बिल ऑफ़ सप्लाई कौन बनाता है
- कंपोज़िशन डीलर: ये टर्नओवर पर एक तय रेट से टैक्स भरते हैं और खरीदार से GST नहीं ले सकते।
- रजिस्टर्ड विक्रेता जो GST छूट वाला सामान या सर्विस बेचते हैं, जैसे ताज़े फल और सब्ज़ियाँ, ताज़ा दूध, या कुछ शिक्षा और स्वास्थ्य सर्विस।
जब एक ही बिक्री में टैक्स वाले और छूट वाले दोनों तरह के आइटम हों, तो एक ही "इनवॉइस-कम-बिल ऑफ़ सप्लाई" बनाया जा सकता है।
इसमें क्या लिखना ज़रूरी है
- आपका नाम, पता और GSTIN।
- एक सीरियल नंबर, ज़्यादा से ज़्यादा 16 अक्षर का, जो उस फ़ाइनेंशियल ईयर में दोबारा न आए।
- बिल की तारीख।
- खरीदार का नाम, पता, और अगर रजिस्टर्ड है तो GSTIN।
- सामान या सर्विस का HSN या SAC कोड, विवरण और कीमत।
- आपका सिग्नेचर, या आपके अधिकृत व्यक्ति का।
कंपोज़िशन डीलर को यह लाइन भी लिखनी होती है: "Composition taxable person, not eligible to collect tax on supplies"। बिल ऑफ़ सप्लाई मेकर यह लाइन आपके लिए खुद छाप देता है।
टैक्स इनवॉइस की तरह, ₹200 से कम की बिक्री पर, अगर ग्राहक बिल नहीं माँगता, तो बिल ज़रूरी नहीं है, बशर्ते आप पूरे दिन की बिक्री का एक सारांश रखें।
बिल ऑफ़ सप्लाई और टैक्स इनवॉइस में फ़र्क
| टैक्स इनवॉइस | बिल ऑफ़ सप्लाई | |
|---|---|---|
| GST दिखता है | हाँ | नहीं |
| खरीदार इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकता है | हाँ | नहीं |
| कौन बनाता है | आम रजिस्टर्ड विक्रेता | कंपोज़िशन डीलर; छूट वाला सामान बेचने वाला कोई भी |
बनाएँ
इनवॉइस मेकर खोलें और बिल का प्रकार बिल ऑफ़ सप्लाई चुनें। GST वाले कॉलम हट जाते हैं, कुल रकम में कोई टैक्स नहीं दिखता, और कंपोज़िशन वाली लाइन छप जाती है।